पुरुषार्थ, नानुराम कुमावत द्वारा शुरू किया गया एक विशिष्ट संस्थान है| युवाओं को केंद्र में रखकर शुरू करी गयी यह संस्था का सिर्फ़ नाम ही पुरुषार्थ नहीं है बल्कि सोच में भी इस शब्द की गहराई है| हम युवाओं को धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष के रास्ते पर रहकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते है| इस राह पर चलकर युवा ना सिर्फ़ आगे बढ़ेंगे बल्कि यह उन्नति नैतिक भी होगी|

पुरुषार्थ का मक़सद है धर्म के मार्ग पर चलते हुए अर्थ अर्जन करने का तरीका बताना एवं उस अर्जित धन को अपने भौतिक एवं आत्मिक सुख के लिए सही काम पर लगाना ताकि मोक्ष की राह आसान रहें| यह एक जीने का सलीका है जिसे हम आज के युवाओं को बताना चाहते है ताकि वे अपने जीवन मे धर्मता बनाए रखें| हम इस देश के युवाओं को जोड़े रखना चाहते है ताकि सिर्फ़ व्यक्तिगत विकास ही नहीं पर साथ ही साथ देश का भी विकास हो|